यहाँ बातें करता हूँ मै कुछ दिली जज्बातों की , माझी की कुछ यादों की , राहों में ठिठके रह गए बेबस दरख्तों की , कुछ हर रोज जीते कुछ खट्ते मीठे एहसासों की .... . . बड़ा प्यारा लगता है मुझे ये एहसासों का कारवाँ....बस इन्हे शब्दों में ढालने की कला तलाश रहा हूँ....सच कहूँ अँधेरे में डूब चुकी कुछ अनजान बस्तियों के लिए रौशनी तलाश रहा हूँ .....
Sunday, 4 May 2025
जीवन, सम्बन्ध और भावनात्मक जुड़ाव
Tuesday, 8 April 2025
एक भुरभुरी सी मेड़ और उसके आर पार खड़े हम दोनों ...
हम दोनों एक मेड़ के दोनों तरफ खड़े हैं । अपने कमजोर पलों में अक्सर जब हमारे संवेदनाओं का ज्वार चढ़ता है तो लगता है कि वह मेड़ अब भरभरा जाएगी । लेकिन ऐसे पलों में हम से कोई एक मजबूत बनकर उसे संभाल लेता है । मेरे अंदर इतनी मजबूती नहीं अक्सर यह जिम्मेदारी भी वही निभाती है । अपने शुरूआती दिनों से ही परिस्थितियों ने उसे ऐसे ढाला है कि वह जिम्मेदार होती चली आई है । हमारे रिश्ते को भी उसने ही संभाला था । और एक रोज जब उसको लगा कि यह साथ अब इस रिश्ते की कुर्बानी से ही बचा रह सकता है तो इसमें भी पहला मजबूत कदम उसी ने उठाया । वह बाहर से जितनी मजबूत दिख रही है वह अंदर से उतनी ही कोमल है, सौम्य है यह बात तो मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं । मैं अक्सर सोचता हूं कि हमारे साथ के दिनों की याद आने पर वह क्या करती होगी ? मैं मिलने पर उसकी टिमटिमाती आंखें पढ़ने की कोशिश करता हूं । लेकिन वह बुत सी नजर आती है जैसे उसने अकेले में अपने आपमें बहुत कुछ जज़्ब कर लिया हो ।
~दीपक
Friday, 30 August 2024
वर्तमान जब अतीत की शक्ल लिए खड़ा होगा ...
हमारे रिश्ते में दूर चले जाने की बहुत सी वजहें हैं । लेकिन प्यार, साथ और अपनेपन के किसी धागे ने हमें अब भी बांध रखा है। हम अपनी अपनी दुनियावों में खोते जा रहे हैं। फिर भी एक तय वक्त हमको एक दूसरे के पास लाकर खड़ा कर देता है । दुनियादारी की बातों के बीच सुनते सुनाते,एक दूसरे की आखों में झांकते ...हम कब और कहां खो जाते हैं पता ही नही चलता । एक ऐसी जगह जहां हममें से कोई कुछ बोलता नहीं बस एक दूसरे की जानी पहचानी सांसों की आवाज हमारे कानों में गूंज रही होती हैं । उस दिन की कल्पना से मुझे सिहरन होती है जब एक रोज शायद यह गूंज धीमी होती होती खतम हो जायेगी । और इसी डर से मैं अब इस कल्पना से भागता रहता हूं ।
मैं अक्सर सोचता हूं कि भविष्य के किसी आईने में आज का वर्तमान जब अतीत की शक्ल लिए खड़ा होगा तो मैं खुद से नजरें मिला पाऊंगा न ? या कहीं दूर तो नहीं भागूंगा ? आज की तस्वीर; जो उस वक्त तक अतीत बन जायेगी मैं उसमें रंग भरने की कशक लिए तड़फड़ाऊंगा तो नहीं ....
~दीपक
Friday, 16 August 2024
पुरुषों के नाम एक अपील
Friday, 15 December 2023
आगे बढ़ते रहने का नाम है जीवन या कुछ अधजिए, अचानक छूट गए को याद करना, महसूस करना ...
जब वर्तमान खुशगवार होता है तो शायद अतीत धुंधला जाता है l लेकिन यह सच स्वीकार ही करना पड़ता है की वह पूरी तरह से कभी खत्म नहीं होता l हल्की ठंडी में गुनगुनी धूप सेंकते हम कुछ अच्छे पलों को याद करके कभी भी मुस्कुरा सकते हैं l सुबह सुबह चाय के कप की गर्मी को हथेलियों के बीच रखे कुछ ठंडे पड़ गए रिश्तों की गर्माहट को महसूस करने की कोशिश कर सकते हैं l अतीत उस शहर में अचानक लौट जाने जैसा होता है जहां आपने कभी वर्षों बिताया हुआ था लेकिन बदलाव और समय के प्रवाह ने आपको उसी अपने और अपनों के शहर में अजनबी बना दिया हो l आप अजनबीयत को ओढ़े बहुत देर तक जानी पहचानी गलियों, चौराहों पर भटकते हैं लेकिन जल्द ही वर्तमान में भाग आने को मजबूर होने लगते हैं l हम photographers की भाषा में एक term है "recreating the moments" l किसी पुरानी फोटो को दिखाकर client अक्सर ये term यूज करते हैं l हम client का दिल रखने को न भले न करें पर हमें अच्छे से पता होता है कि बहुत मेहनत से click और एडिटिंग के बाद भी हम उन पुराने पलों की गर्माहट वर्तमान में नहीं भर सकते वैसे ही जैसे पुरानी डायरी के पन्नो के बीच छिपाकर रखे गुलाब की पंखुड़ियों किसी बीते हुए वक्त के उस रंग, उस खुशबू, उस रोमांच को वापस नहीं कर सकते ...
~दीपक
Tuesday, 22 August 2023
मां, शहर और गांव ...
Wednesday, 2 August 2023
एक कौम के विकास की असफलता..
जानवरों और इंसानी कौम में फ़र्क क्या है ... फर्क है सिर्फ बुद्धि और बल के अनुपात का . और आज भी जब-जब यह अनुपात अपना संतुलन खोता है इंसान वापस जानवरों जैसा व्यवहार करने लगता है . चाहे वह खबर किसी नवजात के रेप का हो या किसी अपने की दुर्दांत हत्या और शव के क्षत विक्षत करने या जातीय द्वेष के बदले एक भीड़ के द्वारा महिलाओं का घिनौना अपमान हो . ऐसे अन्य जघन्य मामले जहां मानवता और संवेदनशीलता दम तोड़ती नज़र आती है , यह सब एक कौम के विकास की असफलता को ही दर्शाता है .
~दीपक