यहाँ बातें करता हूँ मै कुछ दिली जज्बातों की , माझी की कुछ यादों की , राहों में ठिठके रह गए बेबस दरख्तों की , कुछ हर रोज जीते कुछ खट्ते मीठे एहसासों की .... . . बड़ा प्यारा लगता है मुझे ये एहसासों का कारवाँ....बस इन्हे शब्दों में ढालने की कला तलाश रहा हूँ....सच कहूँ अँधेरे में डूब चुकी कुछ अनजान बस्तियों के लिए रौशनी तलाश रहा हूँ .....
Sunday, 4 May 2025
जीवन, सम्बन्ध और भावनात्मक जुड़ाव
जीवन में सम्बन्ध सिर्फ तर्क आधारित नहीं हो सकते हैं । गहराई में देखने पर भावनाऐं कई मायनों में जीने का आधार बनती है । हर किसी का व्यक्तित्व कम ज्यादा अनुपात में अच्छाइयों और बुराइयों से मिलकर ही बनता है । किसी की उपस्थिति का मायना उसके अनुपस्थिति में ज्यादा समझ आता है । मुझे नहीं पता यह वर्तमान दुनिया के लिए कितना सही है या नहीं पर मुझे लगता है जुड़ाव का असल मतलब भावनात्मक जुड़ाव ही है ।
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Very deep feeling bhaiya 🙂
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