Sunday, 4 May 2025

जीवन, सम्बन्ध और भावनात्मक जुड़ाव

जीवन में सम्बन्ध सिर्फ तर्क आधारित नहीं हो सकते हैं । गहराई में देखने पर भावनाऐं कई मायनों में जीने का आधार बनती है । हर किसी का व्यक्तित्व कम ज्यादा अनुपात में अच्छाइयों और बुराइयों से मिलकर ही बनता है । किसी की उपस्थिति का मायना उसके अनुपस्थिति में ज्यादा समझ आता है । मुझे नहीं पता यह वर्तमान दुनिया के लिए कितना सही है या नहीं पर मुझे लगता है जुड़ाव का असल मतलब भावनात्मक जुड़ाव ही है । 

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