Friday, 28 November 2025

अनकही मोहब्बत : एक अधूरी सी कहानी




लखनऊ की हल्की सर्द हवा उस रात कुछ ज़्यादा ही चुभ रही थी।
दो लोग—जो एक-दूसरे से दूर हो चुके थे... अचानक बातों में उतर आए।और यह बातचीत वही पुरानी यादों का दरवाज़ा खोल बैठी,जिसे दोनों ने बहुत कोशिशों के बाद बंद किया था।
महीनों की दूरी के बाद अचानक मैसेज आया—
एक सीधा-सा शब्द:
“Missing you…badly ”
और उसी पल दोनों की सारी मज़बूतियाँ ढह गईं।

लड़के ने मान लिया था कि उस रिश्ते को अब वापस नहीं होना—लेकिन एक मैसेज ने सालों की इच्छाओं, शिकायतों,
और आधे-अधूरे सपनों को फिर से जिंदा कर दिया।

वह लड़का लिखता गया—
“मै भी आज तक तुम्हे भूल नहीं … मै भी नहीं चाहता था कि तुम इस तरह से दूर चले जाओ…तुम खुश रहो…बस यही चाहता हूँ।”
पर उसकी उंगलियाँ काँप रहीं थीं।

और लड़की धीमे से जवाब देती—
दूर तो मैं आज भी नहीं हूँ… पर पास रह भी नहीं पाती।”

दोनों खूब हँसे, खूब छेड़ा एक-दूसरे को…लेकिन हर लाइन के पीछे एक हल्की-सी टीस छुपी थी,एक ऐसा सच जिसे दोनों जानते थे—कि ये रिश्ता दोस्ती भी नहीं बन सकता…और प्यार के नाम पर निभ भी नहीं सकता।

लड़की बार-बार कहती—
मैं तुम्हें सिर्फ़ दोस्त बनकर नहीं देख पाऊँगी। तुमसे मिलूँगी तो दिल फिर वही महसूस करेगा…और फिर वही तकलीफ़ होगी।”

लड़के ने भी दिल की बात खोल दी—
मैं तो बस इतना चाहता हूँ कि तुम मेरी ज़िंदगी से पूरी तरह गायब न हो जाओ। कभी-कभी एक संदेश भेज देना… बस इतना काफ़ी है।”

फिर दोनों ने अपने सपने सुनाए—वो सपने जो कभी पूरे नहीं होने वाले थे।

लड़की ने हँसते हुए बताया—
मैंने सपना देखा था कि तुम्हें कोई बड़ा पुरस्कार मिल रहा है,
और तुम स्टेज पर सबके सामने मेरी तारीफ़ कर रहे हो…
और मैं रो रही हूँ।”

लड़का भी मुस्कुराया—“मैंने भी सपना देखा था…तुम उस मेरी फेवरेट सारी में मेरे सामने आती हो,पहले थप्पड़ मारती हो,फिर कसकर गले लगा लेती हो…और हम दोनों रो पड़ते हैं।”

इन सपनों में जितनी हँसी थी,उतना ही दर्द भी छिपा हुआ था।
बातों-बातों में पुराने ग़लतफ़हमियाँ भी सामने आईं—
“तुमने मुझे वक़्त नहीं दिया…”
“तुमने भरोसा नहीं किया…”
“किसी तीसरे ने हमारे बीच जगह बना ली…”
“मुझे लगता था तुम भी धोखा दोगी…”

दोनों अपनी-अपनी लड़ाई लड़ते रहे,
और कभी एक-दूसरे के साथ खड़े ही न हो पाए।फिर आई वह पंक्ति…जो दोनों के दिल में चुभी—
चलो, इसे अनकहा ही रहने देते हैं…नाम मत दो इस रिश्ते को।”

और फिर हँसी-मज़ाक की कुछ हल्की बातें—
शादी, फोटो, रिजेक्शन, सपने, सरप्राइज़…
सब एक प्यारी कोशिश थी दिल की भारी रात को हल्का करने की।अंत में लड़का धीरे से बोला—
कभी ज़्यादा प्यार आए…तो एक आख़िरी बार समय निकालकर मिल लेना।”

लड़की ने बस “हम्म…” कहा—
एक छोटा-सा जवाब,
जिसमें हजारों भाव छुपे थे।

रात खत्म हुई…दोनों ने “Good night” लिखा—
और अपने-अपने कमरे की चुप्पी में जा सोए।
लेकिन उस रात…

दोनों जानते थे कि
कहानी खत्म नहीं हुई—
बस अनकही रह गई।


~दीपक

2 comments:

  1. Replies
    1. Wow it is a touching and relatable story Tripathi jii

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