Thursday, 12 February 2026

मै कई दिनों से एक आसमान ढूंढ रहा हूं....

मेरे सीने में, नहीं दिल के कोने में, नहीं नहीं पूरे जेहन में कुछ भारी सा अटका हुआ है । मैं कई दिनों से सोच रहा हूं कि उसे खुरच के दूर फेंक दूं । लेकिन वह दिनों दिन भारी होता जा रहा है । मै कई दिनों से एक आसमान ढूंढ रहा हूं जहां मैं जी भर के चिल्ला सकूं और कोई मुझसे वजह न पूछे । कई दिनों से याद कर रहा लेकिन रोना भूलने की वजह से मैं डूबता जा रहा हूं । कलम से कागजों पर अक्षर की जगह एक तस्वीर बनाना चाहता हूं । एक ऐसी तस्वीर जो मुझसे बातें करते समय सिर्फ मेरी बुराइयां न गिनाए । बुराइयां हर किसी में होती है । ये बात मुझे दुनिया ने पहले ही बता रखा है । 

~दीपक







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