Thursday, 15 May 2025

मनचाही खुशबू और फूल

ऐसे कई सारे फूल हैं जो मुझे आकर्षित कर रहे हैं । लेकिन पास जाने पर मुझे मनचाही खुशबू नहीं मिल रही नहीं । कुछ फूल नए हैं तो कुछ पुराने । मैं अपनी बालकनी को गुलजार तो देखना चाहता हूं लेकिन एक साथ ढेर सारा नयापन मैं संभाल नहीं पाता और पुराने फूलों में अब वो खुशबू नहीं रह गई है। 

मैं सपने देखता हूं एक ऐसे फूल की जिसे मैं देर तक निहार सकूं जिसकी सुंदरता ढल जाने के बाद भी उसकी पंखुड़ियों को अपने पसंदीदा किताब के पन्नों के बीच सहेज कर रख सकूं । कभी कभी मैं आत्मसंदेह की स्थिति से भर जाता हूं । कई बार फूलों के प्रति अपने आकर्षण से मै लड़ता भी हूं । अपनी खुशियों के इतने सापेक्षिक होने पर मुझे चिढ़ होने लगी है....

~दीपक

Sunday, 4 May 2025

जीवन, सम्बन्ध और भावनात्मक जुड़ाव

जीवन में सम्बन्ध सिर्फ तर्क आधारित नहीं हो सकते हैं । गहराई में देखने पर भावनाऐं कई मायनों में जीने का आधार बनती है । हर किसी का व्यक्तित्व कम ज्यादा अनुपात में अच्छाइयों और बुराइयों से मिलकर ही बनता है । किसी की उपस्थिति का मायना उसके अनुपस्थिति में ज्यादा समझ आता है । मुझे नहीं पता यह वर्तमान दुनिया के लिए कितना सही है या नहीं पर मुझे लगता है जुड़ाव का असल मतलब भावनात्मक जुड़ाव ही है ।