Friday, 31 October 2025

अंधेरे का कैनवास

मै बहुत देर तक उस अंधेरे में नहीं रह पाता । मै अनंत तक सोच पाने को एक छोर ढूंढ लेता हूं । जैसे रात का अंधेरा नींद आते ही एक कैनवास बन जाता है और उस पर वो सारे चित्र उग आते हैं जिनसे मै उजाले में दूर भागता रहता हूं । मै अंधेरे से ज्यादा डरता हूं या अकेलेपन से; यह मै आज तक ठीक ठीक समझ नहीं पाया । कभी कभी मुझे सपने में एक फीके रंग की दुनिया दिखती है जिसमें रंगीन तितलियां इंसानों को देखकर भागती नहीं है । वो आपस में खूब बातें करते हैं । इंसान ढेर सारे फूल लगाकर तितलियों को संदेशा भेजते है । तितलियां दूर देश से आती है। तितलियां और इंसान जब साथ हंसते हैं तो एक नया संगीन सुनाई देता है । अंत में तितलियां इंसानों के साथ हमेशा के लिए बस जाती हैं और वह फीकी दुनिया एकाएक रंगीन हो जाती है । 

~दीपक