हमारी कभी फोन पर बात नहीं होती थी लेकिन जब भी घर जाता, उन्हें एक किताब का इंतजार ज़रूर रहता था । मैं अक्सर सोचता था एक दिन अपनी लिखी कोई किताब जब इन्हें दूंगा तो कितना अच्छा लगेगा ।
कितनी सारी बातें रह गई । यह सब लिखते हुए बार बार मै अजीब सी पीड़ा अनुभव कर रहा हूं । किसी के चले जाने के बाद ही इतना सब अनुभव क्यों होता है । किसी अपने को अलविदा कह पाना बहुत कठिन है । शायद समय का सबसे बड़ा छल यही है कि वह हमें ये कभी नहीं बताता कि कौन सी मुलाकात आख़िरी है ।
~दीपक